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लोकरंग

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ध्यान भटकाने की कवायदें

  • Dec 08, 2017

किसी मुद्दे से ध्यान कैसे भटकाया जाता है? कोई बच्चा मिठाई की जि़द करे तो उसे खिलोना दे कर बहलाने-फुसलाने की कोशिश की जाती है।

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पितृसत्ता, उग्र व अंध भक्ति पर हमला बोलो-कंगना रनौत

  • Dec 08, 2017

मुम्बई। हमें पितृसत्ता, उग्र व अंध भक्ति पर जमकर हमला बोलना चाहिए। उक्त आशय की बात  बालीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने कही। एक अवार्ड कार्यक्रम भाग लेने आई कंगना से जब फिल्म पद्मावती की अभिनेत्री दीपका पादुकोण को मिल रही धमकी पर प्रतिक्रिया पूछी तो उन्होंने कहा कि कहा कि हमें किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करने के बजाय समाज में मौजूद पितृसत्ता, उग्र व अंध भक्ति पर हमला करना चाहिए। उन्होंने कहा कि...

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साबिर हका की कविताएं

  • Dec 04, 2017

ईरानी मजदूर साबिर हका की कविताएं तडि़त-प्रहार की तरह हैं. साबिर का जन्‍म 1986 में ईरान के करमानशाह में हुआ. अब वह तेहरान में रहते हैं और इमारतों में निर्माण-कार्य के दौरान मज़दूरी करते हैं. साबिर हका के दो कविता-संग्रह प्रकाशित हैं और ईरान श्रमिक कविता स्‍पर्धा में प्रथम पुरस्‍कार पा चुके हैं. लेकिन कविता से पेट नहीं भरता. पैसे कमाने के लिए ईंट-रोड़ा ढोना पड़ता है. एक इंटरव्‍यू में साबिर ने कहा...

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नहीं रहे ‘‘मेरे पास मॉ है’’ कहने वाले शशि कपूर

  • Dec 04, 2017

भारतीय सिनेमा के रोमांटिक हीरो और दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित अभिनेता शशि कपूर का लंबी बीमारी के बाद कोकिलाबेन अस्पताल में निधन हो गया।

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कवि सुरेन्द्र रघुवंशी की कविता संकलन "पिरामिड में हम" भोपाल जनोत्सव में विमोचित

  • Dec 02, 2017

समकालीन कविता के महत्वपूर्णक्रन्तिकारी कवि सुरेन्द्र रघुवंशी के तीसरे कविता संकलन "पिरामिड में हम" का विमोचन कल भोपाल में चल रहे भोपाल जनोत्सव में देश के प्रख्यात हिंदी साहित्यकार असगर वजाहत और विष्णु नागर ने किया।

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बाबाओं की पतन गाथा

  • Nov 27, 2017

महाबली की छवि वाले राम रहीम को अगस्त ने बिलख बिलख कर रूला दिया । मोदी जी की पवित्र चाल चरित्र वाली सरकार के मुख्यमंत्रियों को देख कर कभी कभी शक होता है कि हम किसी देश की जगह , किसी सर्कस में तो नहीं आ गये हैं । जहाँ सर्कस के बीच बीच में हर बार जोकर आते हैं और जनता का मनोरंजन करते हैं ।

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रावण पर उन्होंने तीर नहीं चलाया

  • Nov 27, 2017

मोदी जी को रावण पर तीर चलाना था पर पहले तो उनसे प्रत्यंचा ही नहीं चढ़ी, फिर पता नहीं क्या हुआ कि धनुष ही टूट गया । टूट गया या मोदी जी ने स्वयं उसे तोड़ दिया, पता नहीं। हमारे शहर में एक दादा थे। जलील भेड़े उनको कहा जाता था। उनका एक किस्सा कभी सुना था कि वो हज करने गये और जब शैतान को कंकर मारने का मौका आया तो कंकर हाथ में लेकर बैठे रहे । लोगों ने पूछा तो बोले यार इस शैतान से इतने साल का याराना रहा है, इसको कंकर कैसे मारूं? जलील भेड़े की ईमानदारी तो हज में कम से कम उचक कर बाहर आगयी। मोदी जी की पता नहीं क्या दुविधा थी, रावण पर तीर चलाने में इतने अचकचा से क्यों गये

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जेटली की केटली गरम हो रही है

  • Nov 27, 2017

अंग्रेजी की एक कहावत है लिटिल पाट सून हॉट। आजकल जेटली जी की केटली भी बहुत जल्दी गरम हो जाती है। हालांकि केन्द्रीय वित मंत्री को छोटा बरतन नहीं कहा जा सकता, लेकिन जेटली जी को बात बात पर गुस्सा आ जाता है।

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वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले समाज की स्थापना में चुनौतियां

  • Nov 27, 2017

फिल्म मीडिया ऐसा बहु आयामी कला माध्यम है जो कथा/ घटना, दृश्य, अभिनय, गीत, संगीत, तकनीक आदि के माध्यम से जो प्रभाव पैदा करती है वह जरूरी नहीं कि किसी सम्वाद के शब्दों में सुनायी देता हो। न्यूटन भी ऐसी ही एक नायक प्रधान फिल्म है जिसमें सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक, आदि बहुत सारे विषयों को एक घटना कथा के माध्यम से समेटा गया है, जो देखने में साधारण लगती है।

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कांचा इलैया : एक तल्ख असहमत आवाज़

  • Nov 27, 2017

हमारे देश की सामाजिक-बनावट में जाति एक महत्वपूर्ण बुराई रही है। हज़ारों बरसों तक कथित ऊंचेपन की धौस पर चल-अचल संसाधनों पर बेजा कब्जा कर लिया गया। कथित नीचली जातियों का शोषण होता रहा।

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