Sidebar Menu

लोकरंग

Home / लोकरंग

कवि सुरेन्द्र रघुवंशी की कविता संकलन "पिरामिड में हम" भोपाल जनोत्सव में विमोचित

  • Dec 02, 2017

समकालीन कविता के महत्वपूर्णक्रन्तिकारी कवि सुरेन्द्र रघुवंशी के तीसरे कविता संकलन "पिरामिड में हम" का विमोचन कल भोपाल में चल रहे भोपाल जनोत्सव में देश के प्रख्यात हिंदी साहित्यकार असगर वजाहत और विष्णु नागर ने किया।

Read More

बाबाओं की पतन गाथा

  • Nov 27, 2017

महाबली की छवि वाले राम रहीम को अगस्त ने बिलख बिलख कर रूला दिया । मोदी जी की पवित्र चाल चरित्र वाली सरकार के मुख्यमंत्रियों को देख कर कभी कभी शक होता है कि हम किसी देश की जगह , किसी सर्कस में तो नहीं आ गये हैं । जहाँ सर्कस के बीच बीच में हर बार जोकर आते हैं और जनता का मनोरंजन करते हैं ।

Read More

रावण पर उन्होंने तीर नहीं चलाया

  • Nov 27, 2017

मोदी जी को रावण पर तीर चलाना था पर पहले तो उनसे प्रत्यंचा ही नहीं चढ़ी, फिर पता नहीं क्या हुआ कि धनुष ही टूट गया । टूट गया या मोदी जी ने स्वयं उसे तोड़ दिया, पता नहीं। हमारे शहर में एक दादा थे। जलील भेड़े उनको कहा जाता था। उनका एक किस्सा कभी सुना था कि वो हज करने गये और जब शैतान को कंकर मारने का मौका आया तो कंकर हाथ में लेकर बैठे रहे । लोगों ने पूछा तो बोले यार इस शैतान से इतने साल का याराना रहा है, इसको कंकर कैसे मारूं? जलील भेड़े की ईमानदारी तो हज में कम से कम उचक कर बाहर आगयी। मोदी जी की पता नहीं क्या दुविधा थी, रावण पर तीर चलाने में इतने अचकचा से क्यों गये

Read More

जेटली की केटली गरम हो रही है

  • Nov 27, 2017

अंग्रेजी की एक कहावत है लिटिल पाट सून हॉट। आजकल जेटली जी की केटली भी बहुत जल्दी गरम हो जाती है। हालांकि केन्द्रीय वित मंत्री को छोटा बरतन नहीं कहा जा सकता, लेकिन जेटली जी को बात बात पर गुस्सा आ जाता है।

Read More

वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले समाज की स्थापना में चुनौतियां

  • Nov 27, 2017

फिल्म मीडिया ऐसा बहु आयामी कला माध्यम है जो कथा/ घटना, दृश्य, अभिनय, गीत, संगीत, तकनीक आदि के माध्यम से जो प्रभाव पैदा करती है वह जरूरी नहीं कि किसी सम्वाद के शब्दों में सुनायी देता हो। न्यूटन भी ऐसी ही एक नायक प्रधान फिल्म है जिसमें सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक, आदि बहुत सारे विषयों को एक घटना कथा के माध्यम से समेटा गया है, जो देखने में साधारण लगती है।

Read More

कांचा इलैया : एक तल्ख असहमत आवाज़

  • Nov 27, 2017

हमारे देश की सामाजिक-बनावट में जाति एक महत्वपूर्ण बुराई रही है। हज़ारों बरसों तक कथित ऊंचेपन की धौस पर चल-अचल संसाधनों पर बेजा कब्जा कर लिया गया। कथित नीचली जातियों का शोषण होता रहा।

Read More

व्यंग्य - विधायक बाजार आनलाइन

  • Nov 26, 2017

जब से आन लाइन मार्केटिंग शुरू हुयी है तब से आदमी नित्य क्रियाओं के लिए जाने के अलावा अपनी देहरी नहीं लाँघता। वैसे तो विद्या बालान ने मोदी जी के आग्रह पर घर घर शौचालय बनवा दिये हैं

Read More

व्यंग्य कफन की दुनिया

  • Nov 26, 2017

रजनीश ने कहा है कि जब भी किसी की मृत्यु की बात होती है तो आदमी गम्भीर हो जाता है। उसके दहशत में आ जाने का कारण यह होता है कि उसे अपनी मौत याद आ जाती है।

Read More

मौन रहना - पाब्लो नेरूदा

  • Nov 26, 2017

विश्व कविता में आज चीले के मशहूर कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता पाब्लो नेरूदा की एक कविता

Read More

शवराज में उखडऩा गाँधी की समाधि का

  • Nov 26, 2017

सरदार सरोवर परियोजना के तहत बड़वानी जिले में बरसों से स्थापित महात्मा गाँधी की समाधि को मध्यप्रदेश सरकार ने जेसीबी मशाीनों से उखाड़ दिया । इस समाधि में कस्तूरबा गाँधी और महादेव भाई देसाई के भी अस्थिकलश थे, उन्हें भी उखाड़ दिया गया ।

Read More