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मध्यप्रदेशः वैकल्पिक राजनीति की कोशिशों पर केन्द्रित रहेगा सीपीएम राज्य सम्मेलन, बादल सरोज पहुंचे सबलगढ़

माकपा का राज्य सम्मेलन 16 से 18 दिसम्बर 2017 को मुरैना जिले के सबलगढ़ में होने जा रहा है। सीपीएम पहली ऐसी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी है जिसने अपने राज्यस्तरीय सम्मेलन के लिए उत्तरी मध्यप्रदेश के राजनीतिक रूप से सबसे जाग्रत और सांस्कृतिक रूप से समृध्द सबलगढ़ को चुना है।



मुरैना। माकपा का राज्य सम्मेलन 16 से 18 दिसम्बर 2017 को मुरैना जिले के सबलगढ़ में होने जा रहा है। सीपीएम पहली ऐसी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी है जिसने अपने राज्यस्तरीय सम्मेलन के लिए उत्तरी मध्यप्रदेश के राजनीतिक रूप से सबसे जाग्रत और सांस्कृतिक रूप से समृध्द सबलगढ़ को चुना है।

 इस सम्मेलन के लिए पार्टी के अनेक राज्य स्तरीय नेताओं के साथ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के मध्यप्रदेश राज्यसचिव तथा केंद्रीय समिति सदस्य बादल सरोज गुरूवार सुबह सबलगढ़ पहुंचे।
 
इस मौके पर पत्रकारों से अनौपचारिक दोस्ताना संवाद में उन्होंने प्रदेश की जनता के समक्ष खड़ी चुनौतियों तथा उनके मुकाबले के लिए पार्टी द्वारा अपनाई जाने वाली नीति का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि सभी लोकतांत्रिक मान्यताओं को दरकिनार करने वाली भाजपा की सरकार मध्यप्रदेश की दुश्मन बन गयी है। जनता के प्रति इनके मन में किसी प्रकार को कोई सहानुभूति नहीं है। किसान आत्महत्या कर रहे है और भाजपा के मंत्री उनका मजाक उड़ाते है। बलात्कार की जघन्यतम वारदातें घटती हैं और संघी मानसिकता के मंत्री उनका उपहास करते हैं। जिसका निर्वाचन रद्द हो गया वह मंत्री बना बैठा है - जिसकी  पुलिस छापे मार रही है वह मंत्री बना बैठा है।  सीपीएम सम्मेलन इन सब पर चर्चा कर रास्ते निकालेगा।

भ्रष्टाचार की तो सारी सीमाएं ही टूट चुकी हैं। सरकार के द्वारा चलाई गई एक भी योजना ऐसी नहीं है जो भ्रष्टाचार की शिकार न हुई हो, उन्होंने कहा कि नर्मदा सेवा या़त्रा और सिंहस्थ में भी घोटाले सामने आए है। इसके साथ दलित, आदिवासी, पिछडे़ वर्ग के छा़त्रो को मिलने वाली छा़त्रवृत्ति घोटाला भी सामने आया है। इससे साफ है कि यह सरकार भरोसे के लायक नहीं है। 

बेरोजगारी का आलम यह है कि महज 9 हजार पदो के लिए 10 लाख से अधिक परीक्षार्थी पटवारी की परीक्षा में बैठे। इसमें पीएचडी किए युवाओं से लेकर इंजीनियर्स तक शामिल है। यह बेरोजगारी की सबसे भयावह  स्थिति है।

उन्होंने कहा कि वामपंथ मध्यप्रदेश की जनता को कांग्रेस व भाजपा से अलग एक वैकल्पिक राजनीति के तहत लामबंद करना चाहता  है, इसके लिए दस राजनैतिक दलो व 40 जनसंगठनों के व्यापक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है । यह कोशिश जारी रहेगी, साथ ही इस एकता को जनता के लिए किए जाने वाले संघर्षों को विस्तार देने में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जाए यह भी प्रयत्न किये जाएंगे।
 
सीपीएम के इस 15वे राज्य सम्मेलन के अवसर पर पहले दिन 16 दिसंबर को रैली व आमसभा का आयोजन भी किया गया है। आमसभा को माकपा महासचिव #सीताराम_येचुरी व पोलित ब्यूरो की सदस्य और पूर्व सांसद #सुभाषिणी_अली मुख्य रूप से संबोधित करेंगी।

सम्मेलन के लिए सबलगढ़ को चुने जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसके पीछे एक उद्देश्य ग्रामीण आबादी खासकर किसानों की समस्याओं को संघर्ष के केन्द्र में लाना है, जिससे बड़ी आबादी को राहत मिल सके। वहीं इसी के साथ माकपा के पूर्व सचिव बहादुर सिंह धाकड़ की यादों के साथ  रिश्ता तरोताजा करना भी है, जिनकी  जन्मभूमि और शुरुआती कर्मभूमि यह इलाका रहा।  वे सीपीएम के पूर्व राज्य सचिव तथा केन्द्रीय समिति सदस्य थे।

उनके साथ सीपीएम राज्य सचिव मंडल सदस्य व पूर्व कैलारस नपाध्यक्ष अशोक तिवारी तथा सबलगढ नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष मुरारीलाल धाकड़ भी उपस्थित थे।

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