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अभिमत

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शिवराज सरकार की साजिश - श्रम कानूनों का खात्मा,  कोरोना के बहाने मजदूर वर्ग पर हमला 

  • May 25, 2020

कोरोना वायरस जैसी महामारी से निपटने की सभी की जिम्मेदारी है, जिसे समूचे देश व प्रदेश की आमजनता भी बेहतर तरीके से पूरी कर रही है।

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कोरोना की जाति और धर्म तलाशते मनु के वायरस

  • May 25, 2020

एक कहावत है कि गिद्द को सपने में भी लाशों  के ढेर नजर आते हैं।  भेडियों की बारात गाँव बसाकर नहीं लौटती।

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कोरोना से जूझती महिलायें  

  • May 25, 2020

इस पूरे घटनाक्रम की एक सिल्वर लाइनिंग है जिसकी नायिकायें भी महिला प्रशासक ही हैं। जिन्होंने राह दिखाई है इस महामारी से जूझते हांफते देशों को इस त्रासदी से बाहर आने की।

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जोर पर 'तानाशाही'

  • May 25, 2020

कोविड-19 वाइरस ने जब तक भारत में अपना खास जोर दिखाया भी नहीं था, उस समय भी मोदी सरकार सीएए/एनआरसीविरोधी आवाजों को कुचलने में  जुटी हुई थी।

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स्पष्ट संकेत दे रहे हैं भाजपा की हांडी के चावल 

  • May 23, 2020

यूं कहावत पुरानी है और पुराने लोग इसे बार बोर दोहराते है कि रसोईया एक चावल पकड़ कर ही पूरी हांडी के चावल के पक्के या कच्चे होने का अंदाजा लगा लेता है। भाजपा के जो भी चावल हाथ में आ रहे हैं, वे बताते हैं कि काठ की हांडी में चढ़ाये गए चावल पकेंगे नहीं, बल्कि हांडी ही राख हो जायेगी। सत्ता की हवश में भाजपा ने सरकार तो बना ली है। मगर उस...

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कोरोना का मायका, ससुराल और इसका मुफीद इलाज

  • Apr 22, 2020

रास्ता सचमुच बहुत आसान है। रास्ता है बीमारी की जड़ को हटाकर एक ऐसी सामाजिक प्रणाली लाना जिसमे मुनाफ़ा ही ईश्वर न हो। जिसमे विकास और प्रगति प्रकृति और उसकी सबसे अनमोल कृति मनुष्य को रौंदना, कुचलना, लूटना और धनसंपदा इकट्ठा करना न माना जाए। कुछ समय पहले बोले थे फुकोयामा कि अब पृथ्वी और जीवन को सिर्फ समाजवाद ही बचा सकता है।

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राहत कार्यों में विफल -  अब साम्प्रदायिक धु्रवीकरणा में लगी शिवराज सरकार

  • Apr 20, 2020

भाजपा विधायक दल की बैठकें कर रही थी। मगर तब उसे कोरोना की चिंता नहीं थी। उसकी सिर्फ एक चिंता थी कि हर हालत में सत्ता की उसकी हवश पूरी होनी चाहिए। 

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महिला अधिकारों की लड़ाई के महानायक थे बाबा साहब   

  • Apr 19, 2020

बाबासाहेब देश  के सामाजिक ताने बाने को समझने वाले और उत्पीडि़तों की मुक्ति के लिये संघर्ष करने वाले सबसे बड़े नेता के तौर पर उभरे थे। तभी भारत की जनता ने यदि गांधी को महात्मा कहा तो अंबेडकर को महामानव।

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महापलायन; कुछ को बचाने के लिए मेहनतकशों की बलि चढाने पर आमादा निजाम 

  • Apr 12, 2020

प्रधानमंत्री ने लॉकडॉउन की तकलीफों के लिए 'माफी' जरूर मांगी, लेकिन अपने प्रशासन को सार्वजनिक रूप से इसका कोई निर्देश तक देने की जरूरत नहीं समझी कि मेहनत-मजदूरी करने वाले गरीबों के साथ अपराधियों जैसा सलूक करना बंद करें।

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कौन है जो हमारी बारूद गीली कर रहा है?

  • Apr 08, 2020

1757 भारतीय इतिहास का विडंबना वर्ष है।  इसी साल प्लासी का लगभग अनहुआ युद्द जीत कर ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपने राज की शुरुआत की थी। रानी एलिजाबेथ से भारत से व्यापार की 21 साल की अनुमति लेकर  ईस्ट इंडिया कंपनी  बन तो तो 1600 में ही गयी थी।  इसका पहला जहाज और दूत भी 1608 में ही आ गया था।  मगर कंपनी राज की शुरुआत प्लासी की लड़ाई के बाद...

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