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केरल की तरह समग्र पैकेज घोषित किया जाए : माकपा  

  • Apr 06, 2020

बजाय राहत देने के पूरे प्रदेश में आम जनता पर पुलिसिया हमले जरूर हुए हैं। लेकिन मुख्यमंत्री ने इन शर्मनाक घटनाओं पर भी न केवल चुप्पी साध ली है, बल्कि पुलिस की पीठ थपथपाने का ही काम किया है।

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लेकिन किन्तु परन्तु अगर मगर फिर भी से परे है मोरोना वायरस

  • Apr 04, 2020

बीते बुधवार को इंदौर की टाटपट्टी बाखल में कोरोना संभावित बुजुर्ग को जांच के लिए लेने गयी डॉ ज़ाकिया सैयद और नर्सेज, पैरा मेडिकल स्टाफ के साथ जिस तरह की बेहूदगी और बदतमीजी हुयी उसकी सिर्फ निंदा, भर्त्सना और मज़म्मत ही की जा सकती है। उसे लेकर किसी भी लेकिन, किन्तु, परन्तु, अगर, मगर, फिर भी जैसी पतली गली तलाशना किसी मुकाम पर नहीं पहुंचाता। ऐसा करने वाले, कुछ जाने में और काफी कुछ अनजाने...

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 ‘राखीगढ़ी कंकाल का डीएनए’ सिन्धु घाटी के लोग ऋग्वैदिक आर्य नहीं  हैं

  • Oct 19, 2019

सिंधु घाटी सभ्यता का निर्माण ऐसे लोगों ने किया था जिनके जैनेटिक संरचना में स्तेपी की निशानियां नहीं थीं, जबकि आज की उसी क्षेत्र की आबादी में या कम से कम दक्षिण एशिया के सवर्ण पुरुषों में स्तेपी के लोगों की ये निशानियां प्रमुखता से पायी जाती हैं। 

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गौरवपूर्ण संघर्षों और योगदानों के सौ बरस

  • Oct 17, 2019

कम्युनिस्ट पार्टी के सौ बरसों का दौर जबर्दस्त संघर्षों का, आजादी की लड़ाई के दौरान और आगे चलकर आजादी के बाद भी, अनगिनत क्रांतिकारियों की जबर्दस्त कुर्बानियों का और जनता के मुद्दों को राष्ट्रीय एजेंडे पर लाने में उनके उल्लेखनीय योगदानों का दौर है।

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हरियाणा विधानसभा चुनाव : जनता का घोषणापत्र

  • Oct 12, 2019

जनता का घोषणापत्र  मूलत: विभिन्न सामाजिक संगठनों (किसानों के, मजदूरों के, दलितों के, महिलाओं के, माईनोरटिज के, सरकारी गैर सरकारी कर्मचारियों आदि के संगठन) के अग्रणी कार्यकर्ताओं व व्यक्तिगत तौर पर जागरूक नागरिकों ने बनाया है.।

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आजाद भारत के इतिहास मे प्रेस की स्वतन्त्रता पर इतने बर्बर हमले इससे पहले कभी नहीं हुए - त्रिपुरा मे प्रेस स्वतन्त्रता पर बोले पत्रकार राहुल सिन्हा 

  • Oct 08, 2019

‘अगरतला शहर और आसपास के कस्बों-शहरों मे जहां जैसे तैसे अखबार को पहुंचाया गया, वहाँ अखबार लगाने वाले हाकर्स को धमकी दी गई। अनेक हाकर्स पर हमले किए गए। उनके दफ्तर कब्जा कर लिए गए।’ ‘सारे सरकारी विज्ञापन रोक दिये गए । निजी विज्ञापंदाताओं पर भी प्रशासनिक और मनोवैज्ञानिक दबाब बनाया गया - उन विज्ञापनो को भी रुकवा दिया गया।’

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पुनरावलोकन : हिंसक समय में गांधी 

  • Oct 01, 2019

गांधी को समझना है तो उन्हें भी उस समय की परिस्थितियों के साथ जोडक़र देखना होगा। गांधी की एक मुश्किल यह है कि उन्हें समग्रता में ही समझा जा सकता है। टुकड़ों में देखने का एक झंझट उसके एकांगी हो जाने का है। ऐसा करने से हरेक अपनी पसंद या नापसंद के गांधी तो ढूंढ सकता है - मगर गांधी को नहीं समझ सकता। 

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‘हनीट्रैप’ : हर चेहरा बेनकाब हो 

  • Oct 01, 2019

आप किसी भी अखबार की हैडलाईन उठा कर देख लीजिए-शीर्षक करीब करीब एक जैसे मिलेंगे: विष कन्यायें, ब्लैक मेलर और न जाने क्या क्या? इन शब्दों के उपयोग का अर्थ ही यही है कि सारा दोष इन्हीं का है हनी ट्रैप में लिप्त पुरुष तो इनके झांसे में आने वाले सीधे साधे, भोले भाले इंसान हैं, जिनको इन महिलाओं ने अपने जाल में फंसाया है। 

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लोकजतन - बीस साल का सफर

  • Jul 28, 2019

लोकजतन का आगमन तब हुआ था जब लोकतंत्र का चौथा खंभा कहा जाने वाला मीडिया इनके भांड़ और भौंपू की भूमिका में आ गया था। समाचार समाप्त होने लगे। सूचनायें सिकुंडऩे लगी। उपभोक्तावादी संस्कृति को पाला पोसा जाने लगा। जन और जनतंत्र मीडिया से गायब होने लगा।

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लोकजतन सम्मान 2019 : डॉ.राम विद्रोही - पत्रकारिता का एक अनथक सफर 

  • Jul 26, 2019

1857 के स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर देश के आजाद होने तक की लड़ाई में ग्वालियर-चंबल संभाग के योगदान के इतिहास के संदर्भ में उन्होंने काफी महत्वपूर्ण काम किया है। डॉ. लोहिया का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव है।

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